गूगाल को चुनौती! वेब 3.0 से कितना बदलेगा इंटरनेट
- दुनियाभर में मेटावर्स के बाद अब वेब 3.0 की चर्चा शुरू हो गई है।
- यह इंटरनेट का तीसरा वर्जन है, इसे डिसेंट्रलाइज्ड वेब भी कहा जा रहा है।
- आसान भाषा में समझें तो वेब 3.0 के लागू होने के बाद गूगल जैसी कंपनियों का एकाधिकार खत्म होने सकता है और इसका सीधा फायदा यूजर को मिलेगा, जानिए वेब 3.0 क्यों है खास... पहले वेब 1.0 को समझें। -32 साल पहले 1989 में जब वर्ल्ड वाइड वेब की शुरुआत हुई थी वो इंटरनेट का सबसे पहला वर्जन है 1.0 था।
- यह वो था, जिसमें टेक्स्ट का इस्तेमाल किया जाता था। वर्तमान में हम जो इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं वो इसका इम्पूव्ड वर्जन है, जिसका नाम वेब 2.0 है।
- अब ऐसा है : वर्तमान में वेब 2.0 का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- इंटरनेट का ज्यादातर कंटेंट हम गूगल के जरिए सर्च करते हैं।
- गूगल जैसी प्राइवेट कंपनियों के पास आपका डाटा पहुंच जाता है।
कैसा होगा वेब 3.0
- आसान भाषा में समझें तो वेब 3.0 वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे 2.0 से काफी एडवांस्ड होगा।
- एक रिपोर्ट के मुताबिक, नया वर्जन आने पर कोई भी कंपनी यूजर को कंट्रोल नहीं कर पाएगी, क्योंकि 3.0 वर्जन में यूजर के कंटेंट पर उसका ही अधिकार होगा और इस पर किसी एक कंपनी का एकाधिकार नहीं होगा।
मनमानी पर लगाम
- वेब 3.0 के आने से कंपनियों का एकाधिकार खत्म होगा।
- इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे- वर्तमान में मेटा (फेसबुक) के पास वाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत कई प्लटेफॉर्म हैं।
- अगर यह कंपनी चाहे तो अपने तरीके से आपके कंटेंट को मैनिपुलेट कर सकती है।

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