एक गांव में अब न चूड़ियां टूटेंगी, न ही पोंछा जाएगा सिंदूर
उजाला नवाचार का कोल्हापुर के हेरबाड़ गांव में विधवा संबंधी प्रथाओं पर प्रतिबंध
एक गांव में अब न चूड़ियां टूटेंगी, न ही पोंछा जाएगा सिंदूर
पंचायत में प्रस्ताव पारित, ग्रामीणों से मांगा समर्थन
- पुणे. महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिले के एक गांव ने किसी महिला के पति की मौत के बाद अपनाई जाने वाली प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- यानी गांव की कोई महिला अब पति की मौत के बाद न चूड़ियां तोड़ेगी, न माथे से सिंदूर पोंछेगी और न ही मंगलसूत्र हटाएगी।
- शिरोल तहसील के हेरवाड़ गांव की पंचायत ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया है और इस फसल पर गांव वालों का समर्थन मांगा है।
- हेरवाड़ ग्राम पंचायत केसरपंच सुरगोंडा पाटिल का कहना है कि महिलाओं को इन प्रथाओं से गुजरना पड़ता है, जो बहुत अपमानजनक है।
हृदय विदारक दृश्य ने खोला रास्ता
- सरपंच ने बताया, कोरोना की पहली लहर में हमारे एक सहयोगी की दिल के दौरे से मौत हो गई थी।
- उनके अंतिम संस्कार के दौरान मैंने देखा कि कैसे उनकी पत्नी को चूड़ियां तोड़ने, मंगलसूत्र हटाने और सिंदूर पोंछने के लिए मजबूर किया गया। इससे पत्नी का दुख और बढ़ गया वह दृश्य हृदय विदारक था।
- तभी हमने तय किया कि गांव में इस तरह की प्रथाओं पर रोक के कदम उठाएंगे।
समाज सुधारक की वसीयत
- विधवा प्रथाओं के खिलाफ पहल सोलापुर की करमाला तहसील में महात्मा फुले समाज सेवा मंडल के संस्थापक अध्यक्ष प्रमोद जिंजादे ने की।
- उन्होंने घोषणा कि उनकी मौत के बाद पत्नी को इस प्रथा के लिए मजबूर नहीं किया जाए। दो दर्जन पुरुषों ने इस घोषणा का समर्थन किया। कई विधवाओं की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही।
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